सीबीआई की विशेष अदालत ने पौने दो लाख करोड़ के २जी घोटाले के केस की अपनी सुनवाई में कनिमोझी की ज़मानत याचिका को १४ मई तक के लिए ताल दिया है.यह सभी को पहले से ही मालूम है की १३ मई को तमिल नाडू विधानसभा चुनाव के नतीजे आने वाले है.यह तो पहले से ही सर्वविदित है की सीबीआई केंद्र सरकार के दिशानिर्देश पर काम करती है.लेकिन क्या अब सीबीआई की विशेष अदालतों पर भी केंद्र सरकार का दबाव हावी होने लगा है?
इस निर्णय को देख कर यह आरोप लगाना अतिशयोक्ति नहीं होगी.जब बाकी लोगो का फैसला आ चुका है ,तो फिर सिर्फ कनिमोझी का फैसला टालने की क्या ज़रुरत?
क्या कोर्ट का निर्णय तमिलनाडू विधानसभा चुनावों के नतीजों पर निर्भर करता है?क्या कोर्ट तमिल नाडू में द्रमुक के जीत या हार को देख कर आगे कदम उठाएगी?
आज कल राजनीति इतनी ज्यादा प्रदूषित हो चुकी है की किसी पे भी विश्वास नहीं किया जा सकता .ऐसे में आगे यह देखना रोचक होगा की ५ राज्यों के चुनावो में क्या परिणाम आते है और इसका २जी घोटाले व अन्य मुद्दों पर क्या असर पड़ता है.
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