Bharat mata

Bharat mata
HINDU TAN-MAN,HINDU JIVAN,RAG-RAG HINDU ,MERA PARICHAY.........

Wednesday, May 11, 2011

यूपी की ज़मीन राजनीति में जलते किसान..............


आज यूपी के भट्टा परसोल  गाँव में राहुल गाँधी आख़िरकार पहुँच ही गए.गौरतलब है की उस इलाके में प्रशासन  द्वारा किसी भी राजनेता अथवा मीडिया कर्मियों की एंट्री पर रोक लगाई हुई है .परसों जब अजित सिंह ने जाने की कोशिश की तो उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था  .
यहाँ आज की घटना से सबसे पहले तो यह सवाल खड़ा होता है की क्या एक लोकतान्त्रिक देश में इस तरह की रोक किसी राजनेता या मीडिया कर्मी को लेकर, सही है? जब हमारे देश में मीडिया की स्वतंत्रता के गुण गान गाये जाते है, तो फिर वहाँ उन इलाके के लोगों की व्यथा व समस्या को चित्रित करने का हक छिनना क्या मीडिया की स्वतंत्रता का हक छिनना नहीं है?
जहाँ तक राजनेताओं की बात है ,वे जनता के प्रतिनिधि है.उन्हें लोकतंत्र ने यह हक दिया है की वे जनता की समस्याओं में उनके साथ खड़े हो सके.अगर विपक्ष से यह हक छीन लिया जाए तो फिर विपक्ष का मतलब ही सिद्ध नहीं होता.
राहुल गाँधी के वहाँ पहुँचने से सवाल और भी खड़े हुए है.पहला तो यह की जब राजनेताओ के वहाँ जाने पर रोक थी तो राहुल गाँधी वहाँ कैसे पहुँच गए?और जब प्रशासन को उनके पहुँचने की खबर मिली तो फिर उन्हें गिरफ्तार क्यों नहीं कर लिया गया?या फिर बाकी राजनेताओं के वहाँ आने से भी रोक क्यों नहीं हटा ली गयी?
सवाल राहुल गाँधी व केंद्र सरकार की नीयत पर भी उठते है.अगर राहुल गाँधी किसानो के बारे में सही में ही चिंतित थे तो फिर वे खुद क्यों इस तरह से छुप के वहाँ पहुँच गए?वे चाहते तो किसी केंद्र सरकार के प्रतिनिधि को वहाँ  की हालत की समीक्षा करने भेज सकते थे. वे चाहते तो यूपी की मायावती सरकार से भी इस बारे में बात कर सकते थे और दबाव डाल सकते थे की ज़मीन का जबरन अधिग्रहण न हो .और अगर फिर भी समस्या हल न होती दिखे तो वे यूपी की सरकार को ही बर्खास्त कर सकते थे और वहाँ राष्ट्रपति शासन  लगा सकते थे. मगर उनके इस तरह से वहाँ पहुँचने से यह उनकी एक राजनितिक चाल अधिक दिखाई पड़ती है.
अगर किसी बीजेपी शासित  प्रदेश में , और तो क्यूँ, गुजरात  में ही अगर कोई ऐसी घटना हो जाती तो क्या सरकार इसी तरह का नरम रवैया अपनाए रहती? क्या नरेन्द्र भाई मोदी की सरकार को बर्खास्त नहीं कर दिया जाता?क्या उन्हें  मौत का सौदागर घोषित नहीं कर दिया जाता? फिर मायावती के साथ इतनी नरमी क्यूँ? साफ़ बात है, आगे कांग्रेस मायावती के साथ मिलकर यूपी में सरकार बनाने पर विचार कर रही है. यही कारण है की न मायावती राहुल गाँधी को गिरफ्तार करती है , और ना ही सोनिया गाँधी यूपी सरकार को बर्खास्त करती है.
इन सब राजनीतियों के बीच में फंस किसान रहा है.उसे तो बस अपनी ज़मीन के वाजिब भाव चाहिए.लेकिन राजनीतिज्ञों को इस बात से कोई सरोकार नहीं है. वे तो यह चाहते है की यह मुद्दा और बड़ा बने, जान-माल की और हानि हो, और इस मुद्दे के ऊपर सवार हो कर चुनाव की वैतरणी को पार कर लिया जाए.
लेकिन क्या इतनी स्वार्थपरिता उचित है? क्या हमारे देश में राजनीति का स्तर दिनोदिन नीचे नहीं गिरता जा रहा?क्या सत्ता प्राप्ति ही आज के राजनीतिज्ञों का मुख्या उद्देश्य बन गया है? भले इसकेलिए चाहे कुछ भी करना पड़े ?उन बेक़सूर मासूम किसानों  की जानों की कोई कीमत नहीं है?
किसे परवाह है उनके जला दिए गए घरों की?उजाड़ दिए गए खेतों की?भूखे पेट सो रहे उनके मासूम बच्चों की?सच्चाई  यह है की किसी को परवाह नहीं है .यहाँ तक की इस देश की जनता को भी नहीं .

1 comment: